यात्रा संस्मरण: मिथिला–अवध सम्बन्धसेतु वाणगङ्गा

धर्मेन्द्र विह्वल:

समाज एक राजनीति दू

२०८१ फागुन १० गते अर्थात २०२५ फ्रेबुअरी १२ तारिखक दूपहर करिव एक बजैत हेतै हमरालोकैन भरत उत्तरप्रदेशक बढनीसँ नेपालक कृष्णनगर प्रवेश केलौं । राजनीतिक हिसाबे ठाढ भन्सार (कस्टम) आ पुलिसक ढाठ छोइड दी तँ सामाजिकरुपेँ ई नहि बुझबामे आएत जे नेपाल आ भारत दू देशक सीमाक अन्त आ प्रारम्भ कतऽ आ केना भेलै । ई दू देशबीचक एहने अवस्थितिक बोध हमरा महोत्तरी जिलाक मटिहानी (नेपाल) आ मधवापुर (भारत)क सन्दर्भमे सेहो होइए । एके भेषभुषा, एके भाषा, एके समाज आ संस्कृति मुदा राजनीतिक आ प्रशासनिक विभाजन ।

ओना काइल फागुन ९ गते सेहो हम इएह रस्ता होइत भारत प्रवेश कऽ महाकुम्भमे डुबकी लगेबाहेतु प्रयागराजक यात्रा केने छलौं । काइल कने हडबडी छल नीकजकाँ अवलोकन नहि केने रही । ओना ई जगह ई परिवेश हमरालेल कोनो नव नहि अइछ । बहुत सालसँ हम एहि क्षेत्रक गोटागोटी भ्रमण करैत रहलौं अइछ । मुदा एहिबेर अवस्था कने परिवर्तितसन बुभाएल । विगतमे एक विकसित गामसन लागऽबला कृष्णनगर आब नीक बजार भेलसन लागल । हमरा जानकारी अइछ जे ई जगह बहुत पहिनेसँ नेपाल आ भारतक बीच एक महत्वपूर्ण व्यापारिक नाकाक रुपमे परिचित रहि आएल अइछ ।

बदलैत कृष्णनगर बजारक दृष्य

आसपासक नेपाल आ भारतक लोकलेल ई पूरान वजार जीवन सञ्चालनक महत्वपूर्ण आधार रहि आएल छै । विगतमे हम एतऽ एकाध राइत सेहो वितौने छी । एतहुका पत्रकारसभ मनोज ओझा, मनिष गुप्ता आ अंकुश श्रीवास्तवलगायतसँ हम बरोबरि सम्पर्कमे रहलौ अइछ । नेपालक कपिलवस्तु जिलामे अवस्थित कृष्णनगर नाका पश्चिम नेपालक कपिलवस्तु, गुल्मी, अर्घाखाँची, रोल्पा, रुकुम, प्युठान आ किछुु हदधैर दाङक जनताक लेल परम्परागत वजार रहलै अइछ आ भारत प्रवेशक द्वार सेहो । एतबए नहि बढनीसँ सटल शोहरतगढस्थित कलेज आ विद्यालय नेपालक विद्यार्थीक लेल महत्वपूर्ण शिक्षाकेन्द्र रहलै अइछ ।

हम ओतऽ मनोज, मनिष, आ अंकुशके फोन केलियैन । मनोजक फोन नहि लगलैन मुदा मनिष आ अंकुशक फोन नहि उठलैन । ई दूनुगोटे बादमे फोन केने रहैथ मुदा ताधैर हम ओतऽसँ निकैल गेल रही । पत्नी मुन्नी, पुत्र आदित्य आ रविन्द्रनाथ ठाकुर आ हुनकर परिवार सँगे रहैथ । रविन्द्र अर्थात रवि ठाकुर पश्चिम नेपालक एक सशक्त मानवअधिकारकर्मी । ई तौलिहवास्थित प्रसिद्ध मधेश मानवअधिकार गृह (माहुरी होम)क संस्थापक अध्यक्ष सेहो छैथ । हमरा फोन करैत देखि ओ कहलैथ–ठिक छै हुनकासभक फोन जँ नहि लगैत हुअए तँ छोडि दियौ । बादमे हम आहाँक समाद हुनकालोकैनकेँ कहि देबैन ।

वहादुरगञ्ज: विगत आ वर्तमान
हमरालोकनिक गाडी आगाँ बढिरहल छलै । आब रस्तामे आठ किलोमिटरक दूरीपर एक जगह एलै वहादुरगञ्ज । एहि जगहसँ हमर भावनात्मक निकटता अइछ । करिव २०÷२५ वर्ष पहिने हम दूबेर बहादुरगञ्ज आएल छी आ बेराबेरी कऽ एतऽ दू राति बितौने छी । तहिया पूर्णरुपेण गामऽक प्रकृति आ प्रवृत्तिमे रहल ई जगह आब नीक वजार भऽ गेल छै । ई जगहमे तहियो औद्योगिक सम्भावना रहै आ आइयो एतऽ किछु चर्चित उद्योग छै ।

एतऽ तहिया पेस्टिसाइडक एक प्रसिद्ध उद्योग रहैक । एखन एतऽ तीनटा पैघ प्लाइउडक उद्योगक सँग अन्य उद्योग सञ्चालित छै । कृष्णनगर–चन्दौटा सडक, जे एखन चाइर लेनक छै, एहि खण्डक तौलिहवा जेबाक रस्ताक मोडपर अवस्थित बहादुरगञ्जक सबदिन रणनीतिक महत्व रहलैक अइछ । आइयो ई जगह महत्वपूर्ण मानल जाइत छै । मुदा एकटा महत्वपूर्ण परिवर्तन आएल छै, तहिया हुलाकी सडक सञ्चालनमे नहि रहैक से आब सञ्चालनमे अइछ ।

बहादुरगञ्ज आ तौलिहवा (२२ किलिोमिटरक बीच अत्यन्त स्तरीय सडक सञ्जालक निर्माण भेल अइछ । पहिने तौलिहवासँ कृष्णनगर (३० किलोमिटर जेबालेल लोकऽके भरिदिनधैर लाइग जाइत छलै से आब ४०÷४५ मिनेटमे ई दूरी तय कएल जा सकै छै । हुलाकी सडक सञ्चालनमे एलाबाद एहि क्षेत्रक लोकलेल आवतजावतक सुविधा तँ बढबे केलैए एतहुक जीवनस्तरमे सेहो सुधार एलैए । आर्थिक गतिविधिमे सेहो वृद्धि भेलैए । रोजगारीक अवसरि गामेघरमे उपलब्ध होबऽ लगलैए । एहि क्षेत्रक ग्रामीण इलाकाक लोकलेल कृष्णनगर, वहादुरगञ्ज, तौलिहवा आ चन्द्रौटासन वजार आब दरवज्जेपर आइब गेलैए ।

जाएकालमे मुन्नीकेँ हम एहि स्थानक बारेमे खासे जानकारी नहि देने रहियैन ।
एखन हुनका जानकारी देबाक उद्देश्यसँ पुछलियैन— आहाँके वहादुरगञ्ज बुझल अछि ने ?
ओ कहलीह—देखने तँ नै छियै मुदा सुनने छियै । विभा दिदीक गाम छैन ने वहादुरगञ्ज ?
हम हुनका आश्वस्त करैत कहलियैन— हँ । इएह छै बहादुरगञ्ज । हम मुन्नीकेँ एकटा वस्ती देखबैत कहलियैन— हे एम्हरे छैन हुनकासभक घर ।
विभा दिदी माने हमर छोटकी पिसी । सम्बन्धमे पिसी मुदा हमरासभ एकपिठीयाजकाँ छी । डेढ दू वर्षक शायद ओ जेठ छैथ । पिसा असमय कालकलवित भऽ गेलाह । दूटा बेटामेसँ जेठका काठमाण्डू रहैत छैथ तँ छोटका भैरहवामे । दिदी कहिओ काठमाण्डू तँ कहिओ भैरहवामे रहि समय व्यतीत कऽ रहलीह अइछ ।

फोटाेः गुगल

एखन हुनकर परिवारक एतऽ के के रहै छथिन से जानकारी नहि अइछ । एते पक्का अइछ जे विभा दिदी आ हमर पिसियोतसभ एखन एतऽ नहि रहैत अइछ । ई अनिश्चित अवस्थामे हुनकासभक घर ताकब आ ओतऽ जेबाक कोनो खास औचित्य नहि छलए । तएँ ने घर तकलौं आ ने ओतऽ जेबाक प्रयत्न केलौंं ।

हमर पिसाक बाबुकेँ तहिया एतऽ प्रभावशाली व्यत्तिकm रुपमे गणना भेल करैन । राजनीतिदिसि सेहो सामान्य रुचि रहैन कहाँदन । प्हिलबेर जहिया हम ओतऽ गेल रही हमरा हुनक सान्निध्यप्राप्तिक अवसर भेटल रहए । आब ओ गत भऽ गेलैथ । आब हुनकर स्मृति शेष अइछ । दोसरबेर गेल रही पिसाक शायद भिन्नभिनाउज भऽ गेल रहैन । हमर पिसाक परिवार अलगे रहैत छल । हमरा तहियाक दिदीक संघर्ष मोन पडैए । किछु दिनक बाद हुनकासभक घरमे डकैतक आक्रमण भेल रहैन आ हमर पिसी घाहिल भ उपचारार्थ बुटवल अस्पतालमे भर्ना छलीह । संयोग एहन जे ओहिबेरमे हम बुटवलेमे रही । हमरा ई बात ज्ञात भेल आ हम हुनक उपचार प्रक्रियामे सहभागी भेल रही । एखन वहादुरगञ्ज आगाँ आएल तँ अनायसे अतीतक पन्नासब उनटऽ लागल रहए आ आँखिक सोझाँ अनेक चित्रसब नाचऽ लागल रहए । पत्रकार मनिषक घर बहादुरेगञ्ज छैन । हम हुनका एकबेर फोन केलियैन मुदा सम्पर्क नहि भऽ सकल ।

वाणगङ्गा आ राम—जानकीक सम्बन्ध
गाडी बहादुरगञ्जसँ हुलाकी सडक पकडैत तौलिहवादिसि सरपट दौगिरहल छलए । हम सडकऽक अगलबगलक वस्तीसभकेँ अवलोकन करैत जा रहल छलौं । मोनेमोन गमिरहल छलौ जे एकटा सडक जीवनकेँ केना परिवर्तन कऽ दैत छै । रस्ताक दू वगली बडकाबडका पक्की घर, वोर्डिङ स्कूल, छोटछोट वजार, यातायातक साधनक निरन्तर आवाजाही आदि आदि । विकास तँ एहिना गति लैत छै ने । गाडी आगाँ बढिरहल छलै ।

आब तौलिहवा वजार लगचिया रहल छलै कि तखने रस्तामे पडल वाणगङ्गा पुल । एहि नदिक चर्चा रामायणलगायत अन्य धर्मग्रन्थसबमे भेल छै । प्राचीन तिलौराकोट दरवारलगसँ बहऽबला ई नदिक आध्यात्मिक महत्व छै । स्थानीय पत्रकार मनिष गुप्ताक अनुसार विवाहक बाद जनकपुरसँ अयोध्या जाइतकाल जानकीजीकेँ रस्तामे पियास लगलैन । भगवान राम आ हुनक सहयोगीसभ पानिक स्रोत तकलैन मुदा नहि भेटलैन तखन श्रीराम धरतीपर वाण प्रहार करैत गङ्गाकेँ आव्हान केलैन आ ओतऽसँ जलप्रवाह भेलैक तखन माता जानकी जलग्रहण केलीह से मान जाइत अइछ । मानवअधिकारकर्मी रवि ठाकुर सेहो कहैत छैथ–भगवान रामक वाणद्वारा गङ्गा एतऽ अवतरित भऽ प्रवाहित होबऽ लगलीह आ तकरबाद निरन्तर एतऽ एक नदि बहऽ लागल जे वाणगङ्गाक नामसँ प्रसिद्ध भेल । ठाकुर कहलैन समाजमे एहिसम्बन्धमे आनोआन किंवदन्ती व्याप्त छै ।

वाणगङ्गा सिचाइ आयोजना

मुदा हम रविजीकेँ कहलियैन–हम तऽ जनकपुर मिथिलाक लोक छी । हमरालेल तँ इएह खिस्सा अनुकूल हएत ने जतऽ हमर जानकीक अस्तित्व जुडल अइछ । जतऽ मिथिला आ अवधक पुरातन सम्बन्ध प्रतिबिम्बित हएत । रविजी सेहो हमर दृष्टिकोणसँ सहमति भऽ हँसऽ लगलाह ।

गाडी वाणगङ्गा पुल पार कऽ तौलिहवा वजारदिसि प्रवेश कऽ चुकल छल । हम रविजीकेँ गाडीएमे कहलियैन–रविजी मिथिला आ अवधबीचक सम्बन्धकेँ नव ढंगसँ निर्माण करबाहेतु हमरासभक भूमिका महत्वपूर्ण भऽ सकैत अइछ । ओहो सहमत रहैथ । गाडी माहुरी होमक प्रागंणमे रुइकगेल छल ।

( लेखक धर्मेन्द्र विह्वल नेपालक एकमात्र समाचार एजेन्सी राष्ट्रिय समाचार समितिक अध्यक्ष छथि) 

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